“निर्भीकता से ही नया आरम्भ किया जा सकता है”

ऐस्ट्रिड वोन श्लाक्टा का कहना है कि 16वीं शताब्दी में कोई “ऐनाबैपटिस्ट धर्मविज्ञान” नहीं था - उस समय अनेक ऐनाबैपटिस्ट धर्मविज्ञान थे।

ऐस्ट्रिड एक मेनोनाइट इतिहासकार हैं और 2025 में ऐनाबैपटिस्टवाद की 500वीं वर्षगाँठ के कार्यक्रम की अगुवाई कर रहे हैं। “डेयरिंग” (निर्भीकता) मेनोनाइट और बैपटिस्ट कलीसिया की इस संयुक्त परियोजना का नाम है जिसमें इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि कलीसिया के इतिहास के प्रकाश में ऐनाबैपटिस्ट आंदोलन का वर्तमान में क्या अर्थ है।

ऐस्ट्रिड कहते हैं, “कलीसियाओं के बीच धर्मविज्ञानों का अन्तर है, हथियारों के प्रयोग को लेकर दृष्टिकोण में अन्तर है, और भी अनेक बातों में अन्तर है। 1525 के बाद 500 वर्षों में, संसार के अलग अलग हिस्सों में ऐनाबैपटिस्ट लोगों के अनुभव भी अलग अलग रहे हैं। हम इस विभिन्नता पर गर्व कर सकते हैं, परन्तु यह हमारे सामने चुनौती भी लाती है।”

वे आगे कहते हैं, “हम भूतकाल को स्मरण रखना चाहते हैं, परन्तु भविष्य की ओर बढ़ना चाहते हैं। वर्तमान में हमारे सामने कौन कौन सी चुनौतियाँ हैं, और किस तरह से इतिहास की सहायता से हम भविष्य की ओर अपने कदम रख सकते हैं? निर्भीकता के बिना नया आरम्भ सम्भव नहीं है।”

जर्मनी की मेनोनाइट, बैपटिस्ट और अन्य सार्वभौमिक (इक्यूमैंनिकल) विचारधारा के ऐनाबैपटिस्ट समूहों ने कार्यक्रमों की एक पाँच वर्षीय श्रृंखला की योजना तैयार की हैः

  • 2020ः परिपक्वता का जीवन बिताने की निर्भीकताः बपतिस्मा, स्वतंत्र इच्छा, और धर्म की स्वतंत्रता।
  • 2021ः दृढ़ता से जीवन बिताने की निर्भीकताः यीशु के अनुरूप स्वयं को ढालना, संसार के अनुरूप न बनना, विश्वास का अंगीकार, शहादत
  • 2022ः दृढ़ता से जीवन बिताने की निर्भीकताः यीशु के अनुरूप स्वयं को ढालना, संसार के अनुरूप न बनना, विश्वास का अंगीकार, शहादत
  • 2023ः अहिंसा का जीवन बिताने की निर्भीकताः शान्ति की कलीसिया, बुराई का उत्तर बुराई से न देने वाली कलीसिया, मेलमिलाप
  • 2024ः आशा के साथ जीवन बिताने की निर्भीकताः परमेश्वर का राज्य, आदर्श संसार, नया आरम्भ।

इसमें भाग लेने वाली कलीसियाएं, प्रतिवर्ष उपरोक्त विषयों पर एक पुस्तक का प्रकाशन करेंगी। आयोजन का समापन ज्यूरिख में 29 मई 2025 को होगा।

2020 का कार्यक्रम 10 अक्टूबर को जर्मनी के हैमबर्ग में आयोजित है। धर्मसुधार के समय से लेकर 21वीं शताब्दी तक मेनोनाइट लोगों के द्वारा जिन प्रमुख विषयों पर जोर दिया गया है, उसकी रूपरेखा तैयार कर इसे एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है, जिसका सम्पादन ऐस्ट्रिड वोन श्कलाक्टा ने किया है। इस आयोजन में विभिन्न प्रश्नों पर विचार विमर्श किया जाएगा, जैसे, “अलग अलग धर्मों वाले समाज में धर्म की पूर्ण स्वतंत्रता का रूप कैसा होगा?” “ऐनाबैपटिस्ट परम्परा के कौन कौन से प्रभाव एक न्यायपूर्ण वातावरण में साथ मिलकर रहने के लिए मानव के बीच आपसी व्यवहार पर दृष्टिकोणों को सामने लाएंगे?” “वर्तमान में परिपक्व मसीहियों के रूप में विश्वासयोग्यता का जीवन जीने का अर्थ क्या है?”

वोन श्कलाक्टा मेनोनाइट रिसर्च सेन्टर, वेयरहोफ, जर्मनी के निदेशक, और ऐनाबैपटिस्ट इतिहास पर लिखीं गई अनेक पुस्तकों के लेखक हैं।

इस कार्यक्रम की योजना तैयार करने में लगे अन्य मेनोनाइट लोगों में लिसा अंगर (एमडब्ल्यूसी), जोहान्नस डिक (बाइबल सेमिनार बोन), वाल्टर जाकोबाइट (अरब्रेट्स जेमिनशाफ्ट मेनोनाइटिसशेर बु्रडरगेमेयडेन ड्यूट्सलैण्ड) और अलरिक अर्नोल्ड (मेनोनाइटिसशेर गेसशिक्ट्स वेरिन) शामिल हैं। अधिक जानकारी के लिए www.taeuferbewegung2025.de देखें।

—मेनोनाइट वर्ल्ड काँफ्रेंस विज्ञप्ति

Updated 25 August 2020: "Council of Christian churches" added.

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